Parveen Shakir Poetry in Hindi - कुछ फ़ैसला तो हो कि किधर जाना चाहिए कुछ फ़ैसला तो हो कि किधर जाना चाहिए पानी को अब तो सर से गुज़र जाना चा...
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New Hindi Ghazal/Sher/Shayari of Anjan मेरे बाद वो भी खुद को सँभाल नहीं पाया, इतना करीब था कि दिल से निकाल नहीं पाया... मेरी रूह में इस तरह...
मंजर भोपाली साहब की एक बेहतरीन छोटी सी ग़ज़ल यहां पेस करता हूँ। आपसे नही बिछड़े, जिंदगी से बिछड़े हैं... हम चराग़ अपनी ही, रौशनी से बिछड़े हैं.......