Ramu,shyamu aur Rinchh - old Hindi Story


दो मित्र और रींछ

 Hindi Me Motivation में आपका स्वागत हे।
कुछ पुरानी यादे हो जाए इसलिए में ये कहानी लिख रहा हु।
हम सब ये कहानी 4वी या सायद 5वी में हम सब पढ़ चुके हे मुझे याद हे तब तक में मेरा गाव Devpar (yax) में Primary School में ये कहानी मेने हिंदी के सब्जेक्ट में पढ़ी थी।

ये कहानी का स्टार्टिंग उनके दो मित्रो से होता हे दोनों मित्रो हे। जिनका एक का नाम हे रामु और दूसरे का नाम हे श्यामू सायद आपको अब कहानी याद आ गई होगी।

रामु और श्यामू बहोती अच्छे मित्र थे वो साथ में ही बड़े हुए साथ में ही खेले साथ में ही पढाई की। अब उनमेसे जो रामु था वो बहोती जबरदस्त इंसान था जो खेल में फर्स्ट आया करता था जो लड़ाई जगडो में खड़ा रहता था।
और वो बहोती हेल्थली इंसान था।

और दूसरी तरफ जो श्यामु हे वो थोडा डरपोक था और वो खेल में कभी भी फर्स्ट नहीं आता था वो हर बार लास्ट आता था। लेकिन श्यामू दिमाग चलने में फर्स्ट था और वो बहोती intelligent था।

एक बार दोनों मित्र रामु और श्यामु जंगल में गुमने गए। बहोती वहापे फल फ्रूट थे बहोती उन्होंने जलसा किय। बादमे वो पानी पीके जंगल में ही सोने वाले थे तो अचानक सा एक आवाज आया वो आवाज को समज नहीं पाये और थोड़ी देर बाद फिरसे कोई प्राणी का आवाज आया। दोनों डर ने लग गए सामने देखा तो सामने से एक रींछ आ रहाथा

रींछ को देख कर तो डर के मारे रामु तो जल्दी जल्दी से एक ऊँचे से पेड़ पर चढ़ गया।
अब दूसरी तरफ रींछ दौड़ के आरहा था तो अब श्यामू को तो पेड़ पे चढ़ना भी नहीं आता था वो बहोती डर गया और श्यामु को एक उसके दिमाग में तरकीब सूजी तो श्यामू वही पे पेड़ के निचे सो गया अपनी साँसे रिछ पास आते ही बंद करदी अब रामु तो बहोत दर गया की भाई ये कर क्या रहाहै?

थोड़ी देर बाद देखा तो रामु को चमत्कार जेसा लगा उसने देखा की यार रींछ श्यामू को सुंग के चला गया तो कुछ समज नहीं आया थोड़ी देर बाद रींछ वहासे चला गया और रामु पेड़ से निचे उतर गया और बादमे रामु ने श्यामू से कहाकि यार तेरेको रींछ ऐसे ही सुंग के कैसे चला गया भाई में तो बहोती दर गया था की वो तेरेको खा न जाए।

तो श्यामू ने हस्ते हुए जवाब दिया की अरे भाई इसा कुछ नहीं सभी जगह पे ताकात काम नहीं आती भाई कुछ जगहों पे दिमाग भी काम आता हे। उसने कहाकि रींछ इसलिए सुंग के चला गया क्योंकि रींछ को इसा लगा की ये मरा हुआ कुछ पड़ा हे और जंगली प्राणी पहले से मरी हुई चीज़ों को नहीं खाते।

ये सुनकर ही रामु चोक गया और उसे सबासी देने लगा की धन्यवाद भाई आज तूने मेरा सब भ्रम तोड़ दिया क्यूकी में अभी तक इसा मान के चल रहा था की सब जगह मेरी ताकत ही काम आने वाली हे।

कुछ हमारी भी Life में इसा ही होता रहता हे लेकिन हम कुछ चीज़ों को ध्यान में रखे बिना आगे चल पढ़ते हे। सभी जगह पे सिर्फ ताकत काम नहीं आती जितना दिमाग काम आता हे।

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  1. Bhai...bahot achha laga muje achhi tarah se yaad he ye story...

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ऑथर के बारे में

नमस्कार बेस्टर्स, मेरा नाम विवेक दरजी है, और यहापे में कुछ शायरियां, कविताएं, सुविचार और वार्ताएं लिखता हूं जो में हिंदी में ही लिखता हूं, और ये ब्लॉग मेने 3 साल पहले बनाया है और ये मेरा पहला ब्लॉग है।