Raaju Aur Unki Garib Maa


Maa sayari hindi
Maa Quotes

राजू पाँच साल का था। उसकी माँ बहुत गरीब थी। राजू की माँ
सब घरों में काम कर कर के किसी तरह अपना
और राजू का पेट भरती थी। एक दिन राजू की माँ उसके लिये दो
तीन दिन के पैसे बचा के मिठाई खरीद कर लायी।
राजू ने इतनी स्वादिष्ट मिठाई पहली बार खाई थी। उसने आधी
मिठाई खाई और आधी एक बर्तन में छिपा कर रख दी। और फिर वह
ये सोच कर सो गया, कि बाकि की मिठाई अगले दिन खायेगा।
अगले दिन जब राजू ने सुबह उठ कर वो मिठाई खाने के सोची , तो
देखा कि मिठाई तो वहॉ थी ही नहीं। अब तो राजू खूब रोया।
ये देख कर अगले दिन उसकी माँ फिर से उसके लिए एक मिठाई ले
आयी। अबकी बार भी राजू ने आधा टुकड़ा अगले दिन के लिए बचा
कर रखा। अगले दिन फिर से वो गायब हो गया। अब तो राजू ने
सोच लिया, कि वो पता करके रहेगा, कि उसकी स्वादिष्ट
मिठाई का टुकड़ा कौन चोर खा जाता है।
राजू की माँ फिर से अपने बचे हुए पैसों से उसके लिए मिठाई लायी।
अबकी बार राजू ने मिठाई का आधा
टुकड़ा एक छोटे मुँह के लोटे में छुपा के रख दिया। रात में चोर का
रास्ता देखते देखते, राजू को नींद आ गयी।
कि अचानक जोर जोर से लोटे की गिरने की आवाज से राजू एकदम
सावधान हो गया। परन्तु उसने जो देखा ,
इससे उसकी साँस ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई। लोटा
जोर जोर से उछल उछल कर इधर उधर भाग
रहा था। उसे समझते देर नहीं लगी, कि उसके लोटे में भूत है। अब तो
डर के मारे उसकी घिग्घी बंध गयी। और वह रात भर लोटे को उठा
पटक करते देखता रहा। अब वह मिठाई के बारे में बिलकुल भूल चुका
था, और उसे ये चिंता थी ,कि अगर लोटे का भूत लोटे को उछालते
भगाते कहीं घर के बाहर ले गया, तो कल वह नहायेगा कैसे।
रात भर इसी तरह चिंता करते करते सारी रात बीत गयी। सुबह राजू
ने माँ को सारी बात बताई। माँ को
पूरी बात समझते देर नहीं लगी। माँ ने लोटा पकड़ कर उसके अंदर
झाँका और उसमे फंसा चूहा राजू को दिखाया
अब तो राजू का डऱ भी भाग गया। उसने सोचा वह बेकार ही
सारी रात डरता रहा। माँ ने लोटे के अंदर हाथ
डाल कर चूहा बाहर निकाल दिया। लेकिन ये क्या , चूहे के पैर में
चोट लग गयी थी, और वह चल भी नहीं पा रहा था।
यह देख कर राजू को बहुत दुःख हुआ। उसने चूहे के पैर में दवाई लगा
दी। चूहा चोट ठीक होने तक राजू के पास रहा। राजू अब बहुत खुश
था, उसे साथ में खेलने के लिए एक नया दोस्त जो मिल गया था।

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ऑथर के बारे में

नमस्कार बेस्टर्स, मेरा नाम विवेक दरजी है, और यहापे में कुछ शायरियां, कविताएं, सुविचार और वार्ताएं लिखता हूं जो में हिंदी में ही लिखता हूं, और ये ब्लॉग मेने 3 साल पहले बनाया है और ये मेरा पहला ब्लॉग है।