इकबाल असहर famous shayari | Iqbal Ashhar Sher in Hindi


वो रोशनी की तलब में गुम है,
मैं खुशबुओं की तलास में हूँ,
मैं दायरों से निकल रहा हूँ,
वो दायरों में समा रहा है...

सुनो समंदर की सोख लहरों
हवाएं ठहरी है तुम भी ठहरो,
वो दूर साहिल पे एक बच्चा, 
अभी घरोंदे बना रहा है...

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